गायों को बचाना इसलिये भी जरूरी


यह सत्य है कि अकेले गाय से ही देश की सरकार व प्रजा किस प्रकार अमीर हो सकती है इसका हम अंदाजा भी नही लगा सकते । इसलिये पशु का कत्लगाह खोलने के बजाय सरकारों को उनका आश्रयस्थल खोजना चाहिये और पशु चिकित्सक व सरकारी कर्मचारी लगाने चाहिये ताकि उनकी सुरक्षा व खानपान को लेकर कोई दिक्कत न हो।संजय जोशी के अनुसार बिना संत समाज के आगे आये गाय वध रूक नही सकता। शिव की इस नन्दनी को लेकर उनकी कई मांगें सरकार से है जिसके लिये संत समाज लगातार प्रयास कर रहा है।उनके द्वारा दर्शाये गयी बाते निम्नलिखित है।
उनका मानना है कि स्वस्थ गाय का वजन तीन क्विटल होता है और उसे काटा जाय तो उसमें 70 किलो मांस निकलता है।उसकी कीमत पचास रूपये यानि 3500रूपये में मांस बिकता है,25 लीटर खून निकलता है जो जिससे कुल कमाई 2000 के आसपास होती है।30से 35 किलो के आसपास हड्डियां निकलती है जो कि 1200 के आसपास बिकती है यानि कुल मिलाकर एक गाय जो काटी जाती है उससे 7000 रूपये मिलता है और हमारा पशु धन भी खत्म होता है। जिसमें से कुछ हिस्सा सरकार के पास जाता है बाकि अवैध रूप से बिक जाता हैं।
उनका मानना है कि अगर गाय न काटी जाय तो हमें 10 किलो गोबर व तीन लीटर मूत्र मिलता है गाय के एक किलो गोबर से 33 किलो फर्टिलाइजर खाद बनती है एक किलो फर्टिलाइजर की कीमत 6 रूपये होती है इस हिसाब से प्रतिदिन दो हजार रूपये मिलता है सबसे खास बात यह है कि इस खाद से जमीन को मैगनीज , फास्फोरस , पोटैशियम , कैल्शियम , आयरन कोबाल्ट,सिलिकान मिलता है जो उसके लिये गुणवत्ता को बढाने वाला होता है।जो आम खाद से दस गुना अधिक फायदेमंद होता है।इस प्रकार देखा जाय तो महीने में 60हजार व साल मे ं6,57,000 आता है गाय के खानपान पर कुल खर्च अच्छे से अच्छा निकाल लिया जाय तो दो लाख से ज्यादा साल में नही हो सकता । बाकी बचत है और  उसे काटा न जाय बल्कि सरकारी संरक्षण में बचाया जाय।क्योंकि अगर गाय का जीवन बीस साल का है तो इंसान करोडपति बन सकता है।
गाय के मूत्र की बात करे तो दवाओं के लिये पेंटेट है और प्रति गाय तीन लीटर मूत्र निकलता है जो कि बाजार में 500 रूपये किलो के हिसाब से बिकता है यानि 1500 रूपये रोज के,इससे 48 प्रकार की बीमारियों का इलाज होता है जो कि घातक बिमारिया है ,पंतजलि योग पीठ इसी का अनुसरण करती है और कई हजार करोड कमा चुकी है। पथमेडा इसी पर आधारित है और सरकार आयुष को लेकर गंभीर है । इस गोमूत्र से भी सात लाख रूपये प्रतिसाल कमाया जा सकता है।सिर्फ दो चीज गोमूत्र व गोबर से साल में 15लाख कमाया जा सकता है।बिना किसी लागत के ,इसलिये सरकार को पशु के लिये कत्लगाह नही आश्रयकेन्द्र खोलने चाहिये।
सरकार चाहे तो हर गांव में मीथेन गैस का प्लांट लगा सकती है,स्वस्थ नवजीवन लोगों को दे सकती है।गांव में गोशाला होगी तो शुद्ध दूध मिलेगा, गैस मिलेगी एलपीजी का खर्च कम होगा बिजली जलेगी।लोगों को पर्याप्त आक्सीजन मिलेगा , फर्जीलाइजर यानि आर्गेनिक खाद मिलेगी तो बीमारियों की संख्या भी कम होगी। इसी प्रकार सरकार गांव में गैस की सप्लाई वाहनों के लिये कर सकती है , आज डीजल व पेटोल की प्रति किलोमीटर 5 रूपये है गैस से यह 50 पैसे प्रति किलोमीटर आयेगी । इंधन भी बचेगा।इस पर काम किया जाय तो सरकार की आय प्रति गांव बढेगी और गावं भी आत्म निर्भर होगे।
सरकार के पास गाय के वास्तविक आंकडे नही है जो है उनकी बात कर लेते है ,17 करोड गाये गौशालों में है जिसमें से अगर किसी एक नीति पर चला जाय जैसे गोबर से खाद बनाये तो खाद की पूर्ति पूरी हो जाती है पूरे देश में आर्गेनिक खाद हो सकता है।मिथेन गैस के लियेकाम किया जाय तो बिना पेटोल डीजल के देश को टांसपोर्ट को चलाया जा सकता है।मूत्र पर काम किया जाय तो बिमारियों का सफाया हो सकता है।किसी देश से मदद  लेने की जरूरत नही है।सरकार का खजाना व लोगों का खजाना अकेले गाय भर सकती है।उनके अनुसार हमारे देश में पशु को परिवार का एक हिस्सा माना गया है और इसलिये इसे बढायेगें तो देश खुद आगे बढेगा।यह हमारे देश रूपी शरीर का रीढ है जिसपर आने वाले पीढियों का भविष्य निर्भर है इसलिये इसे बध नही बचाने की जरूरत है।

One thought on “गायों को बचाना इसलिये भी जरूरी

  1. बिलकूल सही बात है सर…अगर गो घन नहि बचेगा तो हिंदुस्तान बबाँद हो जायेगा…ईस बात की चिंता सरकार को और सभी नागरीको को करनी चाहिए.

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