हिन्दू पौराणिक स्थलों को विश्व पटल पर लाना जरूरी

पूरा विश्व हिन्दू व हिन्दुत्व के प्रभाव में है और वह उसके बारे में जानना चाहता है क्योंकि यही  ऐसी  व्यवस्था है जहां एक आदमी का या एक औरत का जीवन जीवनपर्यन्त किसी के लिये समर्पित रहता है। इस धर्म के गुरू कौन थे , कौन सी परम्परायें रही है। और क्या हुआ है इस बारे में जानने को वह उत्साहित है लेकिन न तो धर्म गुरू उनकी जिज्ञासा शांत कर पा रहें है और न ही सरकार इस पर ध्यान दे रही है। यह सभी से अच्छा है और इसे विश्व में स्थापित करने की जरूरत है।
वास्तव में देखा जाय तो भारत विश्व में सोने की चिडिया कहा जाता था क्योंकि जो यहां लौकिक था वैसा विश्व में कही नही था।और जो लोगों ने कपोल कल्पित बातें में वर्णित कर रखा था वह यहां साक्षात देखने को मिलता था।जिसे देखने की आखें कभी कल्पना भी नही करती थी वह यहां विराजमान था। लेकिन उन चीजों का प्रचार न करके वह दिखाया गया जो हमारी गुलामी का प्रतीक था । विदेशी लोग महाराणा प्रताप , रानी लक्ष्मी बाई आदि के बारे में जानना चाहते थे , पृथ्वीराज चौहान के बारे  में जानना चाहते थे । महाभारत के पात्रों के बारे में  जानना चाहते थे । भगवान राम के , कृष्ण के बारे में जानना चाहते थे उन्हें हाजी अली , ताजमहल व ख्वाजा को दिखाया गया । अकबर ,औरगंजेब , बाबर व कुतुबुदीन के बारे मे बताया गया।पौराणिक चीजों को छिपाया गया। राम कृष्ण के नाम पर जो चीजें थी उसे विवादित बनाया गया । शिव मंदिर की महिमा नही बतायी गयी और नही देवियों का यशस्वी दिखाया गया।
सवाल यह आखिर क्यों ? हमारी सरकार ने ऐसा क्यों नही , हिन्दुस्तान पर क्या वह आतंकी मुसलमान बनकर हूकूमत करते रहें इस बात का मलाल रहा और इस हसरत से राज करते रहे।हजरत मोहम्मद सल्ल के नवासे सरकार वारिस अली शाह को भी नही बक्शा ,देवाशरीफ में भी कुछ नही किया और लूट घसोट का अड्डा बनाकर रख दिया । तीन वक्त की मेहमान नवाजी तक सीमित रखा और मोईदीन चिश्ती व निजामुद्दीन औलिया का गुणगान करते रहे।यह भी भूल गये कि वह उनकी बिरादरी से नही है और फकीर बन गये।किया क्या यह बात हो सकता है उनकी समझ में आती हो। सैयद सालार मसूद गाजी जिसने करोडों ंलोगों की हत्या इसलिये करवा दी क्योंकि वह मुस्लिम नही बने और महिमा मंडित कर रहें है।भारत के पटल पर जो दरगाहें है उन्हें यदि यह सरकार रखना चाहती है तो रखे लेकिन उसके साथ हिन्दूआंे के चीजों को भी रखे , उनके पौराणिक स्थलों को रखे और चमत्कारिक चीजों को समायोजित करे।जो आने वाले समय के लिये बहुत जरूरी है नही तो लोग भारत को भी इस्लामिक देश मानकर अपना रिश्ता तोड लेगें।
कुछ चमत्कारिक चीजें है जैसे जगन्नाथ पुरी का मंदिर , जहां की छाया नही दिखती , मणि कट्टम का शिव मंदिर जहां गर्म पानी में लोग स्नान करते है किन्तु शरीर नही जलता और प्रसाद भी उसी कुण्ड में पकता है। केदारनाथ जहां आक्सीजन कम होने के बाद लोग बाबा की कृपा से दर्शन करते है और सकुशल वापस लौटते है।पद्भनाभम् मंदिर जो अनोखी सुंदरता के लिये प्रसिद्ध है और तमाम ऐसे मंदिर है जो कि अपने नक्काशी के लिये जाने जाते है। किन्तु सरकार उन पर ध्यान नही दे रही है। हजारेां ऐसे मंदिर है जो कि दुर्गम स्थानों पर है और अपने आप में किसी एडवेंचर से कम नही है लेकिन विदेशों में उसका कोई नाम नही है। इस पर ध्यान देने और उसे भारत के पटल पर , विश्व पटल पर इंटरनेट पर डालने की जरूरत है।
सरकार को चाहिये कि वह हिन्दुस्तान की असली पहचान विश्व के सामने लाये और भगवान राम की मर्यादा व कृष्ण के न्याय को विश्व को बतायें । वेद पुराण ,उपनिषद , रामायण व गीता को विश्व में प्रसारित करें ।ताकि लोग भारत को जान सके और उसके अध्यात्म को पहचान सके। इसके अलावा गुरूकुल जो भारत में चल रहें है और पौराणिक व आध्यात्मिक शिक्षा दे रहें है उन्हें आन लाइन करें और सरकारी मद्द या सब्सिडी दे जिससे उनका विकास हो और सूदूर तक ज्ञान को पहुचाया जा सके। मंदिरों से आने वाले टैक्स को मंदिरों के पुर्ननिर्माण में लगाये और अपनी वेबसाइट पर हर वह चीज मुहैया करायें जिससे लोग हिन्दू के बारे में विश्व में जान सके।इसके अलावा एक पौराणिक बोर्ड का या मंत्रालय का गठन करे जो भारतीय संस्कृति , सम्यता व संस्कारों केसाथ साथ धरोहरों व पूजा स्थलों की निगरानी करें देखभाल करे।

One thought on “हिन्दू पौराणिक स्थलों को विश्व पटल पर लाना जरूरी

  1. हमारे भारत ने दुनिया को वेद दिया है।
    दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इसकी कदर हम भारतीयों को ही नही है। जबकि दुनिया समझ चुकी है भारतीय संस्कृति के महानता को।
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संग़ठन का होना वरदान साबित हो रहा है इस देश के लिए।

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